Saturday, January 5, 2008

बहाना बहाना सिर्फ बहाना

रोज की तरह आज भी घर पर बात कर रह था। तभी माँ बोली फिरन चाची नहीं रहीं। गोवा में उनका निधन हो गया। करीब दस दिन हुए। गांव जाने पर कौन भूजा लेकर आयेगा। और दिवार के किनारे से च च कि आवाज देकर आँगन में बुलाएगा। फिर बैठा कर खूब सारी बातें करेगा। अपने बारे में, गांव के बारे में, सबके बारे में। गांव पहुँचते ही हमारा पहला ठिकाना होता था फिरन चाचा का घर। बाबू जी के पुराने दोस्त जो थे। सबसे अधिक फिक्र चाची को ही लगी रहती थी। खाया कि नहीं। नहाया कि नही। चाय पीने क्यों नही आया। न जाने कितने सवाल। अब सारे सवाल ख़त्म। भोपाल जाने के बाद से एक बार भी गांव नही गया। हर बार कोई नया बहाना। इस बार समय कम है तो अबकी काम अधिक। मिल ही नहीं पाया। लेकिन अब कब मिलना होगा। कोई बताएगा कि आखिर हम मिलना क्यों चाहते हैं। किसी से भी। क्या मिलता है। बता दो यार।

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