Saturday, January 5, 2008
ढीठ कहीं के
अभी बस अभी मेरे एक दोस्त, कह सकते हैं, का समस आया। नए साल कि शुभकामना और थोडी शिक़ायत भी। हद दर्जे कि नाटकियेता है। कहाँ से सीखा अपने ये सब। फिक्र इसका नही कि खुद जान लिया मुसीबत ये कि दूसरो को भी सिखा रहे हैं। लेकिन एक नसीहत, सामने वाले को मूर्ख समझने में बुराई नही है लेकिन पूरे तौर पर चूतिया ही समझना कहाँ तक मुनासिब है। आप ही बताईये।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment